Featured Posts
Recent Articles

रोगों से बचाव और मुक्ति का रामबाण हल (ज्योतिष और रोग) अन्तिम भाग

रोगों से बचाव और मुक्ति का रामबाण हल:--
वर्तमान युग को यदि "लोहयुग" कहा जाए तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी. अन्य सभी धातुओं को कहीं पीछे छोड आज लोहा हमारे समूचे जीवन में कितना अधिक समा चुका है. जीवन के हर क्षेत्र में बस इसी धातु की घुसपैठ दिखाई पडती है ------दरअसल बीमारीयों/रोगों का मूल कारण भी यही है. हम भोजन इत्यादि के लिए जिन पात्रों (बर्तनों) का प्रयोग करते हैं, उस धातु का कितना अधिक प्रभाव हमारे शरीर पर पडता है, ये शायद हम लोग नहीं जानते. ज्योतिष की बात की जाए तो इसमें लोहा/स्टील शनि ग्रह की धातु मानी जाती है. जिसका प्रभाव मुख्य रूप से मानव शरीर के वात-संस्थान पर पडता है. लोहे का अधिक मात्रा में किया गया उपयोग शरीरगत अग्नितत्व(सूर्य, मंगल प्रभाव) एवं आकाशतत्व (बृ्हस्पति प्रभाव) को दूषित कर मानवी शरीर को रोगों का विश्राम गृ्ह बना देता है.
अग्नितत्व दूषित होने से रक्त और पितजन्य विकार, मसलन रक्त विकार, शिरोरोग, ह्रदयघात, पीडा, चक्कर, नेत्रकष्ट, स्मृ्तिनाश, मृ्गी, विक्षिप्तता, भ्रम, आन्त्रशोथ, मंदाग्नि, अतिसार और अजीर्ण तथा आकाशतत्व के दूषित होने से शोथ, गुल्म, ब्रण, चर्मदोष आदि इन प्रक्रियात्मक (Functional) रोगों में से किसी न किसी एक अथवा एक से अधिक व्याधि से आज के युग में अधिकतर व्यक्ति पीडित है.
आईये जानते हैं कि आप अपनी जन्मकुंडली के अनुसार कैसे निज शरीर का विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाव और उनसे मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं:---
1. मेष, सिँह, वृ्श्चिक लग्न के व्यक्ति यदि भोजन के लिए ताँबे के बर्तनों का प्रयोग करें तो जहाँ एक ओर ये उनके पित्त को निर्दोष रख, गुर्दे का रोग, ह्रदय दौर्बल्य, मेद रोग, रक्त व्याधि, यक्ष्मा, अर्श-भगंदर इत्यादि किसी प्रकार के पुराने चले आ रहे रोग के लिए रामबाण औषधी का काम करेगा, वहीं इसके नियमित प्रयोग से नया रोग भी उनके नजदीक फटकने से पहले सौ बार सोचेगा.
2. मिथुन,कन्या, धनु और मीन लग्न के व्यक्तियों द्वारा लोह (स्टील) पात्रों का अधिक मात्रा में प्रयोग विस्मृ्ति (यादद्दाश्त में कमी), अनिन्द्रा, गठिया, जोडों का दर्द, मानसिक तनाव, अमलता, आन्त्रदोष इत्यादि किसी रोग का कारण बनता है. इनके लिए भोजन में काँसे के बर्तनों को प्रयुक्त करना शारीरिक रूप से सदैव हितकारी रहेगा.
3. वृ्ष, कर्क, तुला लग्न के व्यक्तियों को सदैव भोजन के लिए चाँदी और पीतल (मिश्र धातु) दोनों प्रकार के बर्तनों का संयुक्त रूप से प्रयोग करना चाहिए. लोह पात्रों का अधिकाधिक उपयोग इनके लिए नेत्र पीडा, स्वाद ग्रन्थियाँ, कफजन्य रोग, असन्तुलित रक्त प्रवाह, कर्णनाद, शिरोव्यथा, श्वासरोग इत्यादि किसी रोग-व्याधी का कारण बनता है.
4. मकर लग्न के व्यक्ति के लिए अन्य किसी भी धातु के सहित प्रतिदिन लकडी के पात्र का प्रयोग करना भी इन्हे वायु दोष, चर्म रोग, विचार शक्ति की उर्वरता में कमी, एवं तिल्ली के विकारों से मुक्ति में सहायक और भविष्य में उनसे बचाव हेतु रामबाण इलाज है.
5. कुम्भ लग्न के व्यक्ति के लिए तो लोहा (स्टील) ही सर्वोतम धातु है. इसके साथ ही इस लग्न के व्यक्तियों को यदाकदा मिट्टी के पात्र में "केवडा मिश्रित जल" का भी सेवन अवश्य करते रहना चाहिए.

Share and Enjoy:
We will keep You Updated...
Sign up to receive Latest Articles
Subscribe via RSS Feed subscribe to feeds
सशुल्क समस्या समाधान ( फीस 1100/- रुपए )

आपका नाम *
आपका जन्मविवरण (जन्मतिथि, समय, स्थान) *
ई-मेल *
अपनी समस्या या प्रश्न लिखें *
Powered byEMF Online Form Builder
Report Abuse
Recent Articles
Connect with Facebook
Sponsors
Search
Archives
Categories
Astro Help
Resources
Astro Connect